Sim ka full form | सिम का फुल फॉर्म इन हिंदी

Sim ka full form:- आप सभी लोगों का हमारे इस ब्लॉग में हार्दिक अभिनंदन है। उम्मीद है आप सभी लोग स्वस्थ होंगे। आज हम आपके लिए बहुत ही खास जानकारी लेकर आए हैं। दोस्तों कुछ चीजें हमारी लाइफ में ऐसे ही होती हैं जिनको हम हर दिन बोलते रहते हैं या देखते रहते हैं लेकिन हमें उनके बारे में कुछ ही बातें पता होती हैं अर्थात उनके बारे में पूरी तरीके से हमें कुछ नहीं पता होता है। ऐसा ही आज का टॉपिक है कि SIM किसे कहते हैं। यहां हम जानेंगे कि Sim ka full form क्या होता है।

सुनने में तो यह बहुत छोटा सा शब्द है और आपको भी बहुत ही मामूली सा शब्द लग रहा होगा कि हम क्या आर्टिकल पढ़ रहे हैं लेकिन ध्यान रखें हर छोटी से छोटी चीज में बहुत बड़ी जानकारी छिपी होती है। अपने इस आज के आर्टिकल में हम सिम से संबंधित बहुत सारी बातें करेंगे। इसकी शुरुआत कैसे हुई, और किसने इसको बनाया था। ऐसे ही कई रोचक बातों कि आज हम बात करेंगे। आपको बस आर्टिकल को अंत तक पढ़ते रहना है। जिससे कि आपको हमारे आज के आर्टिकल – Sim ka full form में रुचि रहे और आपको बहुत सारी अहम जानकारियां प्राप्त हो सके।

Sim ka full form

आप सभी लोग सिम का इस्तेमाल तो करते ही होंगे लेकिन आपके लिए यह जानकारी नहीं होगा की आखिर सिम का पूरा नाम क्या है यानि की Sim ka full form क्या है तो सिम की full form – Subscriber Identity Module होती है।

Sim ka full form

  • S- Subscriber
  • I- Identity
  • M- Module

सिम का फुल फॉर्म हिंदी में-

बहुत से लोग सिम का पूरा नाम हिंदी में जानना चाहते है की सिम का हिंदी में क्या नाम है तो सिम का हिंदी भाषा में ग्राहक पहचान मॉड्यूल है।

  • S- Subscriber ( ग्राहक )
  • I- Identity ( पहचान )
  • M- Module ( मॉड्यूल )

सिम किसे कहते हैं? – What is called SIM 

दोस्तों फोन तो आजकल हर कोई चला रहा है और हर कोई सिम के बारे में जानता ही है लेकिन कुछ बातें ऐसी होती हैं जो बहुत कम लोग ही जानते हैं तो बात करें हम सिम की तो यह एक छोटी सी ऐसी डिवाइस है जो दो नेटवर्क को आपस में इंटरकनेक्ट करती है अर्थात दो नेटवर्क में आपस में संबंध स्थापित करती है। दोस्तों एक बहुत ही रोचक जानकारी यह है कि जिस इंसान ने सिम का निर्माण किया था उसका आज तक कुछ भी अता पता नहीं है लेकिन वह जिस कंपनी में काम करता था।

वह एक जर्मन की कंपनी थी जिसका नाम था Giesecke एंड Devrient.आम बोलचाल की भाषा में सिम को एक एंटीने की तरह माना जाता है जो हमारे फोन को दूसरे फोन से कनेक्ट कर देता है और फिर ध्वनि के सिंगल उस पर स्थानांतरित होते हैं। परंतु अगर देखा जाए तो ऐसा नहीं है हमारे फोन में एंटीना पहले से ही मौजूद रहता है जो कमांड मिलते ही अपना काम शुरू कर देता है।

अर्थात यह एंटीना स्वता ही सिम कार्ड पढ़ने के बाद नेटवर्क को सर्च(search) करने लगता है और सही network स्थापित होने पर स्थाई हो जाता है। दोस्तों अब बात करते हैं कि Sim ka full form क्या है? तो हम आपको बता ही देते हैं कि सिम का पूरा नाम होता है – सबस्क्राइबर आइडेंटिटी मॉड्युल (Subscriber Identity Module).

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आकार के अनुसार सिम कितने प्रकार के होते हैं? – Types of SIM based on size

तो दोस्तों अब बात कर लेते हैं कि सिम कितने प्रकार के होते हैं। बाजार में आजकल तीन प्रकार के सिम कार्ड उपस्थित हैं। मोबाइल के हिसाब से यह तीनों प्रकार के सिम अपने आप में ही खास हैं।तो बिना किसी देर के आइए जानते हैं इन तीनों SIMs के बारे में-

Standard SIM Cards (स्टैंडर्ड सिम) – यह बाजार में सबसे पहले आए थे अर्थात 2010 से पहले यह सिम मोबाइल में प्रयोग किए जाते थे। यह सबसे बड़े साइज की सिम होते हैं। इनका साइज 25x 15 mm होता है।

Micro SIM Cards – यह सिम कार्ड पहले वाले सिम कार्ड से थोड़े से छोटे रहते हैं। इनके आकार पर विशेष ध्यान दिया गया था। क्योंकि यह यह हैंडसेट को पतला रखने में विशेष भूमिका निभाते हैं। इनका साइज 12×15 mm होता है।

Nano SIM Cards – मोबाइल में प्रयोग होने वाले सबसे छोटे आकार के सिम होते हैं और इन्हें लगभग 2015 के बाद बाजार में उतारा गया था।आजकल इन्हीं सिमों का यूज ज्यादा होता है। वर्तमान में उपलब्ध high technology (उच्च तकनीकी) वाले फोन भी इसी nano सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं।

तकनीकी के आधार पर सिम कार्ड के प्रकार ( Types of SIM based on technology )

उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह आर्टिकल SIM ka full form पसंद आ रहा होगा और आपने अभी तक बहुत सारी जानकारियां प्राप्त कर लिए होंगे अब इस पैराग्राफ में हम आपको बताएंगे कि तकनीकी के आधार पर सिम कार्ड कितने प्रकार होते हैं और हिंदी क्या-क्या विशेषताएं होती हैं। तो बने रहिए हमारे इस आर्टिकल में।

  1. GSM (Global System for mobile) – इस प्रकार की सिम का निर्माण सन 1970 में किया गया था जिसकी निर्माता कंपनी BELL LABORATORIES है। इसका डाटा ट्रांसफर रेंज 800Mhz से2GHz तक होता है। यह एक प्रकार की बहुत ही उपयोगी सिम है उसका प्रयोग बहुत किया जाता है।
  2. CDMA (Code Division Multiple Access) – इस प्रकार के सिम जीएसएम से कम कारगर होती हैं यह सीएसएस टेक्नोलॉजी पर काम करती हैं। इस प्रकार की SIM में कोई भी स्पेसिफिक frequency यूजर को नहीं दी जाती है। GSM SIM के मुकाबले यह काफी हल्के कार्य करती हैं। इनकी डाटा ट्रांसफर स्पीड8mb/sec तक होती है।

1G/2G/3G/4G क्या है? – What is 1G/2G/3G/4G

यह सभी, मोबाइल नेटवर्क के generations हैं। इसकी शुरुआत 1G से हुई थी।

  1. 1G Network – को सन 1980 में लांच किया गया था और यह एनालॉग सिग्नल पर काम करती थी। अपने कम रेंज के कारण यह कुछ ही दिनों में प्रयोग से बाहर हो गया।
  2. 2G Network – 2G नेटवर्क को सन 1995 में लांच किया गया था। और ज्यादातर शुरुआती फोन में इसी का ही प्रयोग किया गया। कॉलिंग की सुविधा तो इसमें एकदम अच्छी थी इससे इंटरनेट की स्पीड में कुछ खास इजाफा नहीं हो पाया। इसकी इंटरनेट स्पीड 144Kbit/sec तक ही थी।
  3. 3G Network – अब बात करते हैं 3G नेटवर्क की। तो दोस्तों यह नेटवर्क के मामले में काफी अच्छा साबित हुआ इसमें इंटरनेट की अच्छी खासी स्पीड मिलती थी। इसको जापान ने 1998 में लांच किया इसका प्रयोग करके इंटरनेट का आनंद आसानी से उठाया जा सकता है। हमारा आज का आर्टिकल SIM ka full form अपने आप में ही बहुत रोचक साबित हो रहा है। अतः इसे अंदर तक पढ़ते रहिए।
  4. 4G Network – यह एक ऐसा नेटवर्क है जिससे सभी लोग परिचित ही होंगे क्योंकि वर्तमान समय में यह नेटवर्क पूरे इंडिया और पूरे विश्व में फैल चुका है। यह नेटवर्क आपको बहुत ही हाई स्पीड इंटरनेट देता है। ऊपर बताई गई सभी नेटवर्क जनरेशन से फास्ट यह नेटवर्क अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।

सिम कार्ड कैसे काम करता है? (How does SIM card works)

Sim ka full form और उसके बारे में इतना सब जानने के बाद अब हमारे दिमाग में यह प्रश्न आता है कि सिम कार्ड काम कैसे करता है? आखिर वह क्या प्रक्रिया रहती है जो यह हमें दूसरे सिम कार्ड से कनेक्ट करके हमारी बातों को किसी दूसरे फोन पर पहुंचा देता है। दोस्तों सिम कार्ड एक बहुत छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक चिप होता है। जब हम इसे अपने फोन में डालते हैं तो यह हमारे सिस्टम के साथ काम करके जीएसएम नेटवर्क को सर्च करने लगता है। और जब कोई GSM नेटवर्क इसे अपने आसपास  मिल जाता है तब यह उस से कनेक्ट हो जाता है।

जब हम किसी को कॉल करते हैं या किसी का नंबर डायल करते हैं GSM नेटवर्क मोबाइल के ट्रांसलेटर से signal भेजकर connect होता है । फिर उसके बाद आप जो नंबर डायल करते हैं, उसको यह सेटेलाइट की सहायता से सर्च करता है और आपके द्वारा डायल किया गए नंबर से कनेक्ट कर देता है। उम्मीद है दोस्तों आपका हमारे द्वारा प्रदान की गई जानकारियां अच्छी लग रही होंगी और आप हमारे आर्टिकल का आनंद लेते होंगे।

E-SIM क्या है? (What is E-SIM)

यह एक ऐसा sim है जिसका कोई आकार नहीं होता है। यह फोन में embedded आता है। यह एक प्रकार का वर्चुअल सिम कार्ड (virtual SIM Card) होता है। यह एक सॉफ्टवेयर की मदद से ही काम कर पाता है। जिस तरह SIM ka full form Subscriber Identity Module होता है उसी प्रकार E-SIM ka full form embedded Subscriber Identity Module होता है।

सिम से संबंधित कुछ प्रश्न (Some questions related to SIM)

प्रश्न- Sim ka full form क्या है?

उत्तरसिम का Full form Subscriber Identity Module होता है।

प्रश्नक्या सभी फोन में एकसा ही सिम पड़ता है?

उत्तरजी नहीं, कुछ फोन में स्टैंडर्ड सिम पड़ता है, कुछ में nano SIM card पड़ता है। हालांकि स्टैंडर्ड sim बहुत पुराने phones में इस्तेमाल होते थे।

प्रश्नसिम का आविष्कार करने वाले वैज्ञानिक का क्या नाम है?

उत्तरअभी तक इस बात की कोई ठोस जानकारी नहीं है परंतु वह एक जर्मन की कंपनी थी जिसमे वह वैज्ञानिक काम करता था।

गोविन्द आर्या

Hello friends my name is Govind Arya and I am a student of polytechnic (Information Technology) and I am very fond of writing so I give Hindi content for someone's website. And give information about internet and government scheme.
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